Thursday, November 26, 2009

कुछ तो शर्म करो यार.....

नीतीश जी की सरकार चार वर्ष पूरी कर रही थी और और इस वर्ष भी पूरे ताम-झाम के साथ रिपोर्ट-कार्ड पेश करने की रस्म अदा होनी थी. जश्न में चार चाँद लगाने के लिए राज्य के सभी बड़े-बड़े अखबारों को विज्ञापनों से सजाया गया. विज्ञापन भी इस तरह कि प्रत्येक अखबार को पांच-छह पन्नो का परिशिष्ट लगाना पड़ा. गत २४ नवम्बर का अखबार प्रशस्ति-पत्र ही था. हद तो तब हो गयी जब एक जाने-माने अखबार के कोलकाता अवस्थित मुख्यालय को सारा विज्ञापन चला गया और उसके पटना संस्करण को एक भी हाथ नहीं लगा.
                                                   अब ज़रा मुख्यमंत्री जी के प्रेस कांफ्रेंस पर भी नज़र डालें. स्वागत भाषण में उप-मुख्यमंत्री ने बिहार से मजदूरों के पलायन में आयी कमी को दिखाने के लिए क्या ज़बरदस्त आंकड़ा दिया. बकौल उनके २००६-०७ में ८८५ करोड़ रुपये मानी आर्डर के रूप में बिहार आये और इस वर्ष सिर्फ ५९८ करोड़ रुपये ही आये हैं, मतलब पलायन की संख्या में कमी आयी है. जनाब, इस दुनिया में एटीएम, बैंक जैसी भी कुछ चिडिया है. मुख्यमंत्री जी का संबोधन पडा प्यारा था. निश्चित रूप से बिहार में काम तो बहुत हुआ है, पर आज भी यहीं  भूख से भी मृत्यु हो रही है. नरेगा की क्या स्थिति है, यह किसी से छिपी नही है. खैर, छोडिये  इन बातों को, पर मुख्यमंत्री जी को इतना तो ध्यान रखना था कि प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एक नए पत्रकार को यह कह कर जवाब नही देना कि पहले पुराने लोगों को पूछने दीजीए और फिर  अपने मनचाहे पत्रकारों को बाइज्ज़त नाम लेकर प्रश्न पूछने के लिए आमंत्रित करना, क्या सन्देश देगा. सबसे शर्मनाक बात तो यह थी कि अधिकतर पत्रकार प्रश्न पूछने की जगह नीतीश जी को बधाई देते रहे या बधाई देने के बाद ही  प्रश्न पूछा. बस एक ही कमी खटकती रही कि मुख्यमंत्री के वक्तव्यों पर इन्होनें  तालिया नहीं  बजाईं .